Bank Minimum balance: की नई पॉलिसी ने अब ग्राहकों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। SBI, PNB और HDFC ने अपने-अपने अकाउंट टाइप्स के लिए अपडेटेड मिनिमम बैलेंस नियम लागू कर दिए हैं। इन बदलावों से जुड़े चार्ज, AMB/ QAB आवश्यकताएँ और एक्सेम्प्शंस जानना हर बैंक-कस्टमर के लिए जरूरी है ताकि अनावश्यक पेनल्टी से बचा जा सके और सही अकाउंट टाइप चुना जा सके।
1. नई पॉलिसी — बैंकों ने क्या बदला?
सार्वजनिक और प्राइवेट दोनों बैंकों ने हालिया समीक्षा के बाद मिनिमम बैलेंस नियम अपडेट किए हैं। कुछ बैंकों ने पेनल्टी कम की या कुछ खातों के लिए माफी की घोषणा की है, जबकि कुछ ने AMB (Average Monthly Balance) व QAB (Quarterly Average Balance) को कड़ा कर दिया है। यह बदलाव शाखा के प्रकार (मेट्रो/सेमी-शहरी/ग्रामीण) पर निर्भर करते हैं।
2. SBI का क्या अपडेट है?
SBI ने अधिकांश सामान्य सेविंग अकाउंट्स पर अभी भी मिनिमम बैलेंस की मांग सीमित रखी है, लेकिन कुछ प्रीमियम या विशेष उत्पादों के लिए AMB लागू कर सकता है। खासतौर पर विशेष कैटेगरी (प्रोफाइल्ड/नेट-बैंकिंग वैरिएंट) वाले खातों में नई शर्तें देखी जा सकती हैं; इसलिए खाताधारक को अपने बातचीत शाखा से अपडेट कन्फर्म कर लेना चाहिए।
3. PNB की नई घोषणा
PNB (Punjab National Bank) ने कई खातों के लिए मिनिमम बैलेंस पर पेनल्टी हटाने या नरम करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य छोटे खाताधारकों को राहत देना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना बताया गया है। किन्तु कुछ स्पेशल अकाउंट्स पर अलग नियम बने रह सकते हैं।
4. HDFC के नियम (AMB / QAB)
HDFC बैंक ने मेट्रो शाखाओं के लिए AMB लगभग ₹10,000, सेमी-शहरी के लिए ₹5,000 और ग्रामीण शाखाओं के लिए ₹2,500 जैसी श्रेणियां स्पष्ट की हैं। यदि खाताधारक यह बैलेंस नहीं बनाए रखता तो बैंक शॉर्टफॉल पर चार्ज लगा सकता है (फीस या प्रतिशत आधारित)।
5. इन नए नियमों का ग्राहकों पर असर
- मेट्रो क्षेत्र में रहने वाले ग्राहकों को अधिक AMB रखना पड़ सकता है।
- कम-आय वाले उपभोक्ताओं के लिए PNB का निर्णय राहतकारी है।
- अकाउंट टाइप बदलने या नॉन-प्रेमियम अकाउंट में शिफ्ट होने पर पेनल्टी बच सकती है।
6. पेनल्टी से बचने के 7 आसान उपाय
- अपना बैंक अकाउंट टाइप और उसकी AMB/ QAB शर्तें चेक करें।
- नेट बैंकिंग / मोबाइल ऐप पर ऑटो-नोटिफिकेशन ऑन रखें।
- यदि आवश्यक हो तो नॉन-minimum-balance अकाउंट (जैसे स्वरोजगार/स्टूडेंट/सीनियर सिटीजन) के विकल्प तलाशें।
- छोटे FD/Recurring से बैलेंस मैनेज करें ताकि AMB बना रहे।
- बैंक से “minimum balance exemption” के विकल्प (सीनियर/स्टूडेंट/सरकारी कर्मचारी) पूछें।
- ऑटो-ट्रांसफर सेट करें ताकि महीने के आखिरी दिन बैलेंस कम न हो।
- शॉर्टफॉल चार्जेस के हिसाब से सालाना लागत का अनुमान लगाकर वैकल्पिक बैंक चुनें।
7. क्या करना चाहिए — कदम (Quick Action)
अभी अपनी बैंक-स्टेटमेंट और बैंक की वेबसाइट पर लॉगिन करके AMB/ QAB नियम और शॉर्टफॉल चार्ज देखें। यदि आपका बैलेंस नई लिमिट से कम आता है, तो या तो अकाउंट टाइप बदलें या FD/Recurring से बैलेंस सुनिश्चित करें। बैंक कस्टमर-केयर अथवा शाखा में जाकर भी अपने प्रोफाइल के अनुसार सलाह लें।
निष्कर्ष
Bank Minimum balance के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं—इसलिए अपडेटेड जानकारी रखना जरूरी है। SBI, PNB और HDFC के हालिया बदलाव कुछ ग्राहकों के लिए राहत तो कुछ के लिए चुनौती ला सकते हैं। सावधानीपूर्वक अकाउंट-प्रबंधन, सही अकाउंट टाइप का चुनाव और बैंक से खुलकर बातचीत करके आप अनावश्यक चार्ज से बच सकते हैं।
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