सूर्य ग्रहण की तिथि, समय, सूतक काल और राशियों पर प्रभाव

सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण की तिथि, समय, सूतक काल और राशियों पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में।

 सूर्य ग्रहण की तिथि और समय

साल 2026 में सूर्य ग्रहण निर्धारित तिथि पर दिखाई देगा (स्थानीय समय के अनुसार समय अलग-अलग हो सकता है)। भारत में यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देने की संभावना है।

  • ग्रहण आरंभ: दोपहर के समय (लगभग)
  • मध्य काल: ग्रहण का चरम समय
  • ग्रहण समाप्त: शाम तक

सटीक समय जानने के लिए आधिकारिक खगोलीय संस्थानों या पंचांग का संदर्भ लेना आवश्यक है।

 सूतक काल कब लगेगा?

हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ, भोजन पकाने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है।

  • ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक आरंभ
  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का महत्व
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह

 राशियों पर प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग पड़ता है।

  • मेष, सिंह, धनु: करियर और निर्णयों में सावधानी रखें।
  • वृषभ, कन्या, मकर: आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं।
  • मिथुन, तुला, कुंभ: संबंधों में संतुलन बनाए रखें।
  • कर्क, वृश्चिक, मीन: स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर ध्यान दें।

हालांकि ये प्रभाव सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं।

 ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

  • ग्रहण को सीधे आंखों से न देखें, सुरक्षा चश्मे का उपयोग करें।
  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान करना शुभ माना जाता है।
  • सकारात्मक सोच और ध्यान-योग करना लाभकारी होता है।

सूर्य ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका विशेष महत्व है। सही जानकारी और सावधानी के साथ इस घटना का अनुभव करें।

 

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